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The Magic Staff: An Autobiography of Andrew Jackson Davis (1871)...
by Andrew Jackson Davis

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English

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Publication Date

March 24, 2017

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"...leisurely walking through one of the by-streets of Poughkeepsie, I was suddenly and powerfully pulled back a step or two as by an invisible hand. At the same instant there shot into the sidewalk before me, to the depth of several inches, a heavy crowbar, which had by accident slipped from a workman's grasp upon the roof of a very high building....This fresh testimony from my guardian spirits filled me with gratitude too deep for words...."<br /><br />Andrew Jackson Davis (August 11, 1826 – January 13, 1910) was an American Spiritualist, born in Blooming Grove, New York. <br /><br /> In 1843 he heard lectures in Poughkeepsie on animal magnetism, as the phenomena of hypnotism was then termed, and found that he had remarkable clairvoyant powers. In the following year he had, he said, spiritual messages telling him of his life work.He eventually became known as "the Poughkeepsie Seer".<br /><br />For the next three years (1844–1847) he practised magnetic healing with much success; and in 1847 he published The Principles of Nature, Her Divine Revelations, and a Voice to Mankind, which in 1845 he had dictated while in a trance to his scribe, William Fishbough. He lectured and returned to writing (or dictating ) books, publishing about 30 in all. In 1871, he published "The Magic Staff", a most singular biography of a most singular person which had been extensively read In this country. It is a complete personal history of the clairvoyant experiences of the author from his earliest childhood to 1856.<br /><br />Andrew Jackson Davis, if all that is said of him is true, is certainly a most remarkable man. This book differs in style, method, and substance, from any of his previous works, which are extensively read, and held in various estimation, according to the prejudices or uotions of those who have read them. The present volume is a sort of biography of the public and private career of Mr. Davis. It contains an introduction from the pen of the author's companion in life—that is, his wife. The volume is interesting, as any biography, well and philosophically prepared, must be; and to those who would know more of the personal history and public labors of the " Poughkeepsie Seer," as he has sometimes been called, we may say they will here find the information from his own pen.<br /><br />It is a well-authenticated history of the domestic, social, psychical, and literary career of the author, with his remarkable experiences as a Clairvoyant and "Seer.'' A book of great interest to old and young, containing one of the most singular and touching child-histories ever recorded. It is unlike any of the author's other works, and peculiarly adapted to interest, and at the same time instruct, those unacquainted with his peculiar Philosophy.<br /><br />Many wonderful events, connected with his psychological development, are published for the first time in this work; and the secret of his extraordinary gift is explained and established in a new and most satisfactory manner. We offer it, also, with the belief that its pages are fraught with pure sentiments, which may be advantageously read. Indeed, with all due deference to the views of able critics and scholars, (whose judgments upon this work are yet to be pronounced,) every class of readers will rise from its perusal, not merely delighted with the simple pathos and dramatic romance which pervade every page, but with clearer views and nobler purposes.<br />
Sadguru Nanak: Sadhana Rahasya Aur Jeevan Charitra
by Sirshree

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March 24, 2017

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मैं बड़ा हूँ कहकर छोटे न बने<br />कहें कि मैं ईश्वर के हुकुम से बना हूँ<br /><br />ईश्वर ने बड़े और छोटे हर तरह के मटके (शरीर) बनाए हैं I जब बड़ा मटका कहता है कि ‘मैं बड़ा हूँ’ तो यह कहकर वह असल मैं छोटा हो जाता है I<br />यदि छोटा मटका कहता है कि “मैं तो ईश्वर के हुकुम से बना हूँ, मुझे छोटा या बड़ा मालूम नहीं है,’ तो समझ के साथ यह कहना उसे बड़ा बना देता है I जो छोटे मटके ऐसा कह पाते हैं, ईश्वर के हुकुम से वे बड़ा काम कर दिखाते हैं I अहंकार रखकर जो मटके स्वयं को बड़ा दिखाते हैं, बे ओछा काम कर दिखाते हैं I अहंकार रखकर जो मटके स्वयं को बड़ा दिखाते हैं, वे ओछा काम करके अपनी और दूसरों की नज़रों मैं छोटे हो जाते हैं I मानव जाती के सामने ऐसा कोई उदहारण हैं I<br /><br />गुरु नानक देव संपूर्ण जीवन ईश्वर के हुकुम पर जिए और बड़े बन गए I उनका जीवन उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो प्रभु के हुकुम पर चलना चाहते हैं, परन्तु हिम्मंत नहीं कर पाते I<br /><br />नानक एक ऐसे महान संत हैं, जिन्होंने अपने समय के कर्मकाण्डों पर अपनी वाणी से कड़ा प्रहार किया I उन्होंने सरल भाषा में ज्ञान का प्रचार कर लोगों को मोक्ष की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया, जिसका लाभ आज तक लिया जा रहा है ओर आगे भी लिया जाता रहेगा I<br /><br />इस पुस्तक के माध्यम से गुरु नानक की जीवनी, कहानियों और सीखों का अध्ययन कर ख़ुशी का खज़ाना प्राप्त करें I<br /><br />सरश्री - अल्प परिचय<br /><br />सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद भी वे अंतिम सत्य से दूर रहे।<br /><br />उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया ताकि वे अपना अधिक से अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है वह है - समझ (अंडरस्टैण्डिंग)।<br /><br />सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आपमें पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।’<br /><br />सरश्री ने ढाई हज़ार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की हैं। ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनुवादित की जा चुकी हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जैसे पेंगुइन बुक्स, हे हाऊस पब्लिशर्स, जैको बुक्स, हिंद पॉकेट बुक्स, मंजुल पब्लिशिंग हाऊस, प्रभात प्रकाशन, राजपाल अ‍ॅण्ड सन्स इत्यादि।
Kshama Ka Jadu: Say Sorry Within And Be Free
by Sirshree

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March 24, 2017

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माफ़ी माँगकर इंसाफ़ करने की कला<br /><br />क्या आप स्वयं से प्रेम करते हैं? क्या आप हमेशा खुश रहना चाहते हैं? क्या आप अपने पारिवारिक, सामाजिक, व्यावसायिक रिश्तों को मधुर बनाना चाहते हैं? क्या आप जीवन में सफलता की सीढियाँ चढ़ना चाहते हैं?<br /><br />यदि आपके लिए इन सभी प्रश्नों का उत्तर ‘हाँ’ में है तो आपको बस एक ही शब्द कहना सीखना है –<br />‘सॉरी’ यानी मुझे माफ़ करें.’ सॉरी, क्षमा, माफ़ी.. भाषा चाहे कोई भी हो, पूरे दिल से माँगी गई माफ़ी आपके जीवन में चमत्कार कर सकती है. यह आपका इंसाफ़ (मन की सफ़ाई) कर सकती है. यहाँ तक कि आपके पिछले सभी कर्मबंधन समाप्त कर आपके भाग्य भी चमका सकती है.<br /><br />यह पुस्तक आपको क्षमा का जादू सीखने जा रही है. इसमें आप सीखेंगे –<br />क्षमा के द्वारा सुख- दुःख के पार पहुँचकर आनंदित कैसे रहें<br />विकारों के चंगुल से निकलने के लिए क्या करें<br />अपने सभी कर्मबंधनों को क्षमा के द्वारा कैसे मिटाएँ<br />अपने शरीर के अंगों से क्षमा माँगकर स्वास्थ्य कैसे पाएँ<br />दूसरों को क्यों और कैसे माफ़ करके ख़ुद से प्रेम करें<br />क्षमा से मोक्षमा की अंतिम सफलता असफलता कैसे पाएँ<br /><br />सरश्री - अल्प परिचय<br /><br />सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद भी वे अंतिम सत्य से दूर रहे।<br /><br />उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया ताकि वे अपना अधिक से अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है वह है - समझ (अंडरस्टैण्डिंग)।<br /><br />सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आपमें पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।’<br /><br />सरश्री ने ढाई हज़ार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की हैं। ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनुवादित की जा चुकी हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जैसे पेंगुइन बुक्स, हे हाऊस पब्लिशर्स, जैको बुक्स, हिंद पॉकेट बुक्स, मंजुल पब्लिशिंग हाऊस, प्रभात प्रकाशन, राजपाल अ‍ॅण्ड सन्स इत्यादि।
Bhagwan Buddha: Suman Aur Buddhi Ka Ucchatam Vikas bodh prapti ke...
by Sirshree

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March 24, 2017

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मन और बुद्धि के पार – परम बोध यात्रा<br /><br />सिद्धार्थ को परंतु जीवन में कुछ ऐसे संकेत मिले, जिन्होंने उन्हें खोजी बना दिया| उन्होंने राजसी जीवन को त्याग दिया और दुःख मुक्ति की खोज में जुट गए| इस मार्ग पर उन्होंने अपने शरीर को बहुत कष्ट दिए| दोनों अतियोंवाला जीवन जीने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि मध्यम मार्ग ही सर्वोत्तम मार्ग है|<br /><br />सिद्धार्थ गौतम ने मन और बुद्धि का सम्यक उपयोग किया और उनके पार गए इसलिए उन्हें परम बोध प्राप्त हुआ और वे भगवान बुद्ध बने| यह पुस्तक आपको भगवान बुद्ध के जीवन का रहस्य बताएगी| इस यात्रा में आप जानेंगे –<br />सिद्धार्थ कब और क्यों गौतम (खोजी) बने<br />गौतम की बोध प्राप्ति की यात्रा कैसे सफल बनी<br />बोध प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध की यात्राएँ कैसी थीं<br />भगवान बुद्ध ने अपने शिष्यों को कौन सी शिक्षाएँ प्रदान कीं<br />भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को जीवित रखने के लिए सम‘ाट अशोक ने कैसे महत्वपूर्ण योगदान दिया<br /><br />भगवान बुद्ध ने अपने सम्यक ज्ञान से लोगों की मन:स्थिति देखकर उपाय बताए| जिन लोगों ने उन्हें ध्यान से सुना, समझा, उन्होंने बुद्ध बोध का पूर्ण लाभ उठाया लेकिन जिन लोगों ने बुद्ध के केवल शब्द सुने, वे अपनी मूर्खताओं में लगे रहे| यदि आपने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का असली अर्थ समझ लिया तो यह पुस्तक बोध प्राप्ति के लिए यानी असली सत्य तक पहुँचने के लिए सरल मार्ग बन सकती है|<br /><br />इस पुस्तक में भगवान बुद्ध के जीवन को तीन मु‘य किरदारों में पिरोया गया है| पहले किरदार हैं राजकुमार सिद्धार्थ, दूसरे किरदार हैं गौतम और तीसरे किरदार हैं भगवान बुद्ध| भगवान बुद्ध को गौतम बुद्ध भी कहा जाता है लेकिन कभी सिद्धार्थ गौतम नहीं कहा जाता| इन नामों के पीछे भी रहस्य है| इन तीनों किरदारों की कहानियों को इस पुस्तक के ज़रिए एक नए और अलग नज़रिए से पढ़ें|<br /><br />सरश्री - अल्प परिचय<br /><br />सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद भी वे अंतिम सत्य से दूर रहे।<br /><br />उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया ताकि वे अपना अधिक से अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है वह है - समझ (अंडरस्टैण्डिंग)।<br /><br />सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आपमें पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।’<br /><br />सरश्री ने ढाई हज़ार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की हैं। ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनुवादित की जा चुकी हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जैसे पेंगुइन बुक्स, हे हाऊस पब्लिशर्स, जैको बुक्स, हिंद पॉकेट बुक्स, मंजुल पब्लिशिंग हाऊस, प्रभात प्रकाशन, राजपाल अ‍ॅण्ड सन्स इत्यादि।
Ramakrishna Paramahamsa: Bhakti Ke Bhakt
by Sirshree

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March 24, 2017

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भक्ति के भक्त का सुन्दर जीवन<br /><br />दक्षिणेश्वर में स्थित कालीमाता मंदिर के पुजारी श्री रामकृष्ण परमहंस, सदा ह्रदय के तल पर रहते थे. उनका जीवन भक्ति से सराबोर है. यह पुस्तक ऐसे भक्ति के भक्त की जीवनी व शिक्षाओं को प्रस्तुत करती है. यह पुस्तक ऐसे भक्ति के भक्त की जीवनी व शिक्षाओं को प्रस्तुत करती है. इसमें रामकृष्ण परमहंस के बचपन से लेकर दक्षिणेश्वर तक के किस्सों को बहुत ही रोचक तरीके से दर्शाया गया है.<br /><br />सुंदर और सरल शैली में लिखी गई यह पुस्तक रामकृष्ण और उनके शिष्यों के बीच हुई अनोखी बातचीत के पीछे छिपे गूढ़ ज्ञान को सहजता से सामने लाती है.<br /><br />रामकृष्ण परमहंस किस प्रकार अपने शिष्यों की परीक्षा लेते, इन खटटे-मीठे किस्सों को इस पुस्तक में बड़ी सुंदरता से दर्शाया गया है.<br /><br />उनकी सीधी-सच्ची बातें और निर्लिप्त ज्ञान, लोगों में आज भी भक्ति जागृत करता है.<br /><br />आइए उनकी जीवनी पढ़कर भक्ति, विश्वास और सराहना करना सीखें.​<br /><br />सरश्री - अल्प परिचय<br /><br />सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद भी वे अंतिम सत्य से दूर रहे।<br /><br />उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया ताकि वे अपना अधिक से अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है वह है - समझ (अंडरस्टैण्डिंग)।<br /><br />सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आपमें पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।’<br /><br />सरश्री ने ढाई हज़ार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की हैं। ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनुवादित की जा चुकी हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जैसे पेंगुइन बुक्स, हे हाऊस पब्लिशर्स, जैको बुक्स, हिंद पॉकेट बुक्स, मंजुल पब्लिशिंग हाऊस, प्रभात प्रकाशन, राजपाल अ‍ॅण्ड सन्स इत्यादि।
Rahasya Niyam: Prem, Anand, Dhayn, Samruddhi Aur Parmeshwar Prapt...
by Sirshree

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March 24, 2017

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आपकी उत्तम मार्गदर्शिका<br /><br />क्या आप ऐसी पुस्तक की तलाश में हैं जो जीवन के हर क्षेत्र जैसे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास में आपका पथ प्रदर्शन करे?<br /><br />यदि हाँ तो बधाई हो – आपकी तलाश रहस्य नियम पर आकर समाप्त होती है|<br /><br />इस पुस्तक में आप जानेंगे –<br /><br />* सृष्टि का महा नियम, जो कभी नहीं बदलता<br />* समस्याओं को सुलझाने के उत्तम तरीके<br />* प्रेम और समृद्धि प्राप्त करने का सही तरीका<br />* भूत और भविष्य से मुक्ति का सही मार्ग<br />* ध्यान की डिक्शनरी<br />* आपके असली अस्तित्व की झलक<br /><br />उपरोक्त हर मुद्दा पॉंच रहस्यों के साथ आपके सामने आता जाएगा| इस पुस्तक में दिया गया जीवन का हर रहस्य जैसे-जैसे खुलता जाएगा, वैसे-वैसे आपका जीवन बेहतरीन बनता जाएगा|<br /><br /><br />सरश्री - अल्प परिचय<br /><br />सरश्री की आध्यात्मिक खोज का सफर उनके बचपन से प्रारंभ हो गया था। इस खोज के दौरान उन्होंने अनेक प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन किया। इसके साथ ही अपने आध्यात्मिक अनुसंधान के दौरान अनेक ध्यान पद्धतियों का अभ्यास किया। उनकी इसी खोज ने उन्हें कई वैचारिक और शैक्षणिक संस्थानों की ओर बढ़ाया। इसके बावजूद भी वे अंतिम सत्य से दूर रहे।<br /><br />उन्होंने अपने तत्कालीन अध्यापन कार्य को भी विराम लगाया ताकि वे अपना अधिक से अधिक समय सत्य की खोज में लगा सकें। जीवन का रहस्य समझने के लिए उन्होंने एक लंबी अवधि तक मनन करते हुए अपनी खोज जारी रखी। जिसके अंत में उन्हें आत्मबोध प्राप्त हुआ। आत्मसाक्षात्कार के बाद उन्होंने जाना कि अध्यात्म का हर मार्ग जिस कड़ी से जुड़ा है वह है - समझ (अंडरस्टैण्डिंग)।<br /><br />सरश्री कहते हैं कि ‘सत्य के सभी मार्गों की शुरुआत अलग-अलग प्रकार से होती है लेकिन सभी के अंत में एक ही समझ प्राप्त होती है। ‘समझ’ ही सब कुछ है और यह ‘समझ’ अपने आपमें पूर्ण है। आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्ति के लिए इस ‘समझ’ का श्रवण ही पर्याप्त है।’<br /><br />सरश्री ने ढाई हज़ार से अधिक प्रवचन दिए हैं और सौ से अधिक पुस्तकों की रचना की हैं। ये पुस्तकें दस से अधिक भाषाओं में अनुवादित की जा चुकी हैं और प्रमुख प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित की गई हैं, जैसे पेंगुइन बुक्स, हे हाऊस पब्लिशर्स, जैको बुक्स, हिंद पॉकेट बुक्स, मंजुल पब्लिशिंग हाऊस, प्रभात प्रकाशन, राजपाल अ‍ॅण्ड सन्स इत्यादि।<br />
Ignite
by Kadee Carder

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Publication Date

March 23, 2017

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Do you ever feel like, well, maybe you just weren’t cut out for this thing called “Life”? Do you ever feel stuck? Are you trying to accomplish Very Big Things? Are you just trying to get out of the bed in the morning? Preach, yo.<br />What do you love doing? I like to write. I dig a great movie, I hoard cheesecake, and I adore new purses, but I come alive when I write. What makes you feel blissful? Are you trying to kickstart a new venture, pursue long-term goals, or basically weather the storm? All of those things which make us feel alive, they are so valuable, are they not? What would life be without bliss and passion and fulfillment?<br />You know, I’ve noticed that those undertakings, while bringing sparkle and adventure and pink polka dot fuzzies, come with a side of heartbreak and an extra shot of the tears of your ancestors. Adventures aren’t always fun. Behind the light, shadows lurk. The good news is…we’re in this together. And we have coffee.
Lose 21 pounds in 21 days: Small guide to weight loss
by Marry-el Marry-el

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English

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Publication Date

March 23, 2017

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A very short and simple guide to help you lose the weight you have been struggling with.
Live and let die: Edição em português (Portuguese Edition)
by David Corrales Rodas

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Portuguese

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March 23, 2017

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O Chalo está de brincadeira comigo, não há outra explicação – dizia, a mim mesmo, enquanto chamava o garçom do bar para pedir a conta. Contudo, sua insistência com o tema me preocupava. Já o tinha visto antes obcecado com o futebol ou com um par de saias, mas agora era diferente. Havia uma convicção em suas palavras que deixava qualquer um estupefato. Ao ver esses olhos de animal teimoso, juro que me deu um pouco de curiosidade. E se fosse possível? A própria ideia era tão louca, tão descabida, que dava medo sequer considerá-la.
Where Does the Consciousness Reside?: Three Minute Read that Cou...
by Roland Marx

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Publication Date

March 23, 2017

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Three Minute Reads that Might Change the Way You View the World is the first series in the Micro-Books™ collection. It consists of down to earth, straight viewpoints on lofty philosophical and spiritual concepts all presented in an easy to read and understand format. The books are meant to be read in three minutes or less and hopefully leave the reader with a greater sense of understanding or perhaps with a renewed desire to continue the philosophical quandary that brought them here in the first place. Book three, Where Does the Consciousness Reside?, addresses the age old question regarding the existence of consciousness and where if anywhere it might call home. This book outlines a few prominent theories and offers the authors intuitive understanding based on years of meditative introspection.

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Kind Reader Monthly Drawing (March 2017)

Congratulations to February 2017's winner Henry H. of New York, USA.